जब याद का किस्सा खोलूँ तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
मे गुज़रे पल का सोचूं तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
अब जाने कौनसी नगरी मैं आबाद हैं जाकर मुद्दत से
मे देर रात तक जागूँ तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
कुछ बातें थी फूलों जैसी कुछ लहज़े खुशबू जैसे
मैं सहर-इ-चमन मैं ठह्लूँ तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
वोह पल भर की नाराज़गियाँ और मान भी जाना पल भर मैं|
आब खुद से भी रूठू तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
मे गुज़रे पल का सोचूं तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
अब जाने कौनसी नगरी मैं आबाद हैं जाकर मुद्दत से
मे देर रात तक जागूँ तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
कुछ बातें थी फूलों जैसी कुछ लहज़े खुशबू जैसे
मैं सहर-इ-चमन मैं ठह्लूँ तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
वोह पल भर की नाराज़गियाँ और मान भी जाना पल भर मैं|
आब खुद से भी रूठू तो कुछ दोस्त याद आते हैं|
2 comments:
Waah Waah. Is this urs?
Of course not..
Post a Comment