Saturday, January 22, 2011

Chakravyuh


Poem by Dilip Chitre.
This poem was recited in the movie by the name of Ardh Satya. It explores the powerlessness of a man in the larger scheme of things.

Chakravyuh - Is a defensive battle formation in shape of a wheel (charka). It was considered to be the most difficult formation to break and often very confusing.
http://en.wikipedia.org/wiki/Padmavyuha


चक्रव्यूह में घुसने से पहले,
कौन था और कैसे था, ये मुझे याद ही न रहा|

चक्रव्यूह में घुसने के बाद मेरे और चक्रव्यूह के बीच,
सिर्फ एक जान लेवा निकता थी, इसका मुझे पता ही न चेलगा|

चक्रव्यूह से निकलने के बाद मैं मुक्क्त हो जाऊं भले ही,
फिर भी चक्रव्यूह रचना मैं फर्क ही ना पड़ेगा|

मरुँ या मारूं, मारा जाऊं या जान से मारदूं,
इसका फैसला कभी ना हो पायेगा.

सोया हुआ आदमी जब नींद से उठकर चलना शुरू करता है,
तब सपनों का सन्सार उसे दोबारा दिख ना पायेगा|

उस रौशनी में, जो निर्णय की रौशनी है,
सब कुछ समान होगा क्या?

एक पलड़े मैं नपुंसकता, एक पलड़े मैं पौरुष
और ठीक तराजू के कांटे पर
अर्ध सत्य!

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